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हमारे वेबसा‌इट मे आपका हार्दिक स्वागत है

नमस्कार! मै हूँ पार्थ बागची, स्टैमरिन्ग क्योर सेन्टरTM के संस्थापक है| इस वेबसाइट द्वारा आप तक पहुँचकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। हकलाहट व उसके उपचार के बारे मे जानकारी प्राप्त करने की आपकी कोशिश और इच्छा के लिए मै तह दिल से शुक्रगुज़ार हूँ। इस वेबसाइट को खुले मन से पढें और अपनी गलत धारणाओं को हटाएँ। यह कोई व्यवसायिक वेबसाइट नही है बल्कि यह एक दिल से दिल का संपर्क है पार्थ बागची से, एक ऐसे व्यक्ति से जो आपके जैसा ही हकलाहट का शिकार हुआ है, पर जिसने साहस कर के अपने और दूसरों को हकलाहट से मुक्त करने की ठान ली है और जिसकी यह कोशिश सफल रही है।

क्या आप हकलाहट के वजह से दुखी, चिन्तित, शर्मिन्दा, असहाय, हताश और निराश है?

फ़िकर छोड दें! अविश्वसनीय, परहकीकत! हकलाहट का इलाज सिर्फ़ दो हफ़्तों मे मुमकिन है। हकलाहट कोई बीमारी नही है और न ही कोई शारीरिक विकलांग है। यह एक पूर्णतः मानसिक बुरी आदत है जो आसानी से ठीक किया जा सकता है और वह भी सिर्फ़ 2 सप्ताह मे। पिछले 25 सालों से पार्थ बागची 23,000 हकलाहट-ग्रस्त लोगों की मदद कर चुके है और आज भी उन तमाम लोगों की मदद कर रहे है जो हकलाहट के वजह से दुखी, चिन्तित, शर्मिन्दा, असहाय, हताश और निराश है।हकलाहट के उपचार के चिर-उपेक्षित और अवहेलित क्षेत्र मे एक क्रांति!

अब और देर न करें! आपके जीवन मे हकलाहट के उपचार को प्राथमिक बनाएँ और अनगिनत मौकों को बरबाद होने से बचाएँ। जितनी जल्दी आप ठीक हो जाएँगे, उतनी जल्दी आपको एक खुशाल ज़िन्दगी मिल पाएगी। अभी हमारा कोर्स करने का निर्णय लें और हमसे संपर्क करें। इस कोर्स को करने के बाद दुनिया की कोई भी शक्ति आपको एक धाराप्रवाह और विश्वस्त वक्ता बनने से रोक नही सकेगी।

इतिहास गवाही देती है कि जो लोग हकलाहट के शिकार होते है, उन मे दूसरों से ज़्यादा क्षमता और गुण होते है पर इस समस्या के वजह से उन्हे सफलता नही मिल पाती है। पर आप इस समस्या का अंत अभी कर सकते है और अपने मंज़िलों को हासिल कर सकते है।अगर आप मे हकलाहट से मुक्ति पाने की इच्छा और कोशिश है तो मेरे पास आपके धाराप्रवाह वक्ता बनने के सपने को पूरा करने के लिए असरदार तकनीक है। मेरा मनना है कि अपने सहस और मेहनत से आप खुद अपना भाग्य लिख सकते है। तुरंत हमारा कोर्स करें और अपने सपने को साकार करें।

विश्वास के साथ आ‌एँ और एक नया जीवन पाएँ सिर्फ़ हमारे विश्व-प्रसिद्ध अंतर-राष्ट्रीय सुपर-स्पेशालिटी सेन्टर पर।

STAMMERING CURE CENTRE'S JOURNEY TO SUCCESS

श्री पार्थ बागची की कहानी उन की ज़ुबानी

मै, पार्थ बागची 6 साल के उमर से 26 वर्षों के लिए हकलाहट का सामना कर चुका हूँ। मेरी हकलाहट इतनी ज़्यादा थी की मैने सबसे बात करना ही बंद कर दिया था। यहाँ तक कि मै अपने मित्रों और परिवारवालों से भी बात नही कर पाता था। अपने हकलाहट के बारे मे सोच सोच कर हर समय मै उदास और हतोत्साहित रहता था। मै अच्छे जीवन की उम्मीद ही छोड दिया था। हकलाहट के वजह से मेरे पढाई पर बुरा असर पडने लगा था। अगर मै परीक्षा मे अच्छे नंबर ला भी लेता तो मौखिक परीक्षा और साक्षात्कार मे तो कभी भी उत्तीर्ण नही हो पाता था।

इन 26 सालों मे मैने भारतीय स्पीच थेरपी, होम्योपथी, आयुर्वेद, भूतविज्ञान, मनोविज्ञान (साइकाइट्री), हिप्नोथेरपी, ब्रिटिश स्पीच थेरपी, धार्मिक ऋषियों के दवाइयाँ, स्पिरिचुआल हीलिन्ग, इत्यादि, सब आज़मा चुका हूँ पर किसी से कोई फाइदा नही हुआ। मै और भी हताश होता गया। यहाँ तक कि मैने संगमरमर और सुपारी अपने जीभ के नीचे रखकर बात करने की कोशिश की है। मैने अपने खाने-पीने के साथ-साथ अपने रहन-सहन को भी पूरी तरह से बदल दिया और अनगिनत नुस्खे अपनाएँ, पर मुझे धोखेबाज़ों और दगाबाज़ों के चुंगल से बचाने वाला कोई नही था।

लोगों ने कई सलाह दिए पर सारे नाकाम रहे। इस दौरान कुछ लोगों ने बडे दयालू और सहानुभूतिपूर्वक होकर मेरी समस्या को समझने की कोशिश की, पर असली समस्या तो यह थी कि लोगों को इस विषय मे कुछ मालूम ही नही था और न ही कोई किताब था जो इस समस्या को सुलझा सकता था। 2001 मे मेरी प्रकाशित पुस्तक ‘हकलाहट का निश्चित उपचार’भारत का सर्व-प्रथम एक मात्र असरदार पुस्तक है।

इन अनगिनत पराजय से परेशान होकर मैने खुद कुछ तकनीकों का आविष्कार किया और अपने हकलाहट से मुक्ति पाई पर करोडों हकलाहट-ग्रस्त लोगों के भविष्य के बारे मे सोच कर मन व्यथित हुआ। 1990 मे मुझे इस सेन्टर की प्रतिष्ठा करने का खयाल मुझे एक सपने के रूप मे मिला। मेरा यह मानना है कि मै इस क्षेत्रमे भगवान के आदेश से आया हूँ। हकलाहट 4000 वर्षों से चली आ रही है पर शायद ही किसी ने इस क्षेत्र मे कोई दिलचस्पी दिखाई है। अपने चार्टर्ड अकाउंटन्ट के व्यवसाय को त्यागकर मै अपने देश को हकलाहट-रहित बनाने के सपने को साकार करने निकल पडा हूँ।

मेरे इस अभियान मे मै अपने देश-वासियों के प्यार और सहयोगिता की आशा रखता हूँ।

स्टैमरिन्ग क्योर सेन्टर की विजय गाथा

स्टैमरिन्ग क्योर सेन्टरTM का सफ़र का आघाज़ हुआ मर्च 1990। अपने गुरू स्वामी विवेकानन्द और मदर टेरेसा के आशीर्वाद से, श्री पार्थ बागची ने इस सेन्टर की स्थापना कलकत्ता शहर मे की थी| इस सेन्टर के सुनाम और ख्याति इस शहर मे ही सीमित नही थी। 1997 मे यह सेन्टर बैंगलोर मे हकलाहट के इलाज का एक अंतर-राष्ट्रीय प्रतिष्ठान के रूप् मे विख्यात होती गई।

इन 25 वर्षों मे पार्थ बागची के स्टैमरिन्ग क्योर सेन्टर ने 23,000 से भी ज़्यादा लोगों को एक हकलाहट-रहित, आशामय और कामयाब ज़िन्दगी का उपहार दिया है। इस दौरान श्री पार्थ बागची ने भारत के विभिन्न शहरों मे 40 से भी ज़्यादा वर्कशॉप किए है। दिल्ली मे 4 बार, मुम्बई मे 5 बार, कलकत्ते मे 15 बार, चेन्नई मे 4 बार, हायदेराबाद मे 4 बार, कोचिन मे, अहमेदाबाद मे, सिलिगुरी मे, गोआ मे 2 बार और अगरतला मे यह कोर्स लेकर हज़ारो की तादात मे लोगों ने हमारा कोर्स कर के हकलाहट से मुक्ति पाई है।

श्री पार्थ बागची, खुद इस समस्या से 26 साल युद्ध कर के विजयी हुए है| उन्होने 23 प्रेरणादायक पुस्तकों की रचना भी की है। इतनी गुणी और सुप्रसिद्ध होने के बावजूद वह अत्यंत विनम्र, सहानुभूतिपूर्वक, सरल व दीन है। हकलाहट के उपचार के प्रति पिछले 25 वर्षों से वह अपना जीवन समर्पित करते आए है और करते रहेंगे। आपका दोस्त, हमदर्द व मार्गदर्शक बन कर, वह किसी भी उमर के किसी भी तरह के हकलाहट को आसानी से ठीक कर सकते है और वह भी सिर्फ़ 2 सप्ताह मे।

पार्थ बागची और उनके स्टैमरिन्ग क्योर सेन्टरTM के 25 सालों के अविश्वसनीय योगदान को कई जगहों से सम्मान प्राप्त हुए है। श्री पार्थ बागची को 7 राष्ट्रीय पुरस्कार एवं 1 अंतर-राष्ट्रीय पुरस्कार से सराहा गया है जैसे कि ‘प्राईड आफ़ इन्डिया’, ‘अचीवर आफ़ द मिलेनियम’, ‘राष्ट्रीय एकता अवार्ड’, ‘नैशनल हेल्थ एक्सेलेन्स अवार्ड’, ‘राष्ट्रीय रत्तन अवार्ड’, ‘प्राईड आफ़ द मिलेनियम अवार्ड’, ‘द मदर टेरीसा अवार्ड’ और ‘एशिया पैसिफ़िक अवार्ड’। पर श्री पार्थ बागची के अनुसार- “मेरी असली कामयाबी यह है कि मै हकलाहट-ग्रस्त लोगों को एक नई ज़िन्दगी और सफलता की आशा दे पा रहा हूँ और देता रहूँगा”।

इन 25 सालों मे उनकी विजय गाथा हर प्रमुख अखबार मे प्रकाशित हुआ है जैसे कि ‘द टाइम्स आफ़ इंडिया’ (मुम्बई, दिल्ली, बैंगलोर और अहमेदाबाद), ‘द हिन्दू’ (हायदेराबाद), ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स’ (दिल्ली), ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (बैंगलोर और हायदेराबाद), ‘द टेलीग्राफ़’ (कलकत्ता), ‘द इकोनोमिक टाइम्स’ (बैंगलोर), ‘द एशियन एज’ (मुम्बई, दिल्ली, कलकत्ता और बैंगलोर), ‘द निऊज़ टाइम्स’ (हैयदेराबाद), इत्यादि। इनके अलावा अन्य प्रधान प्रकाशन रहे है सितंबर 2000 के ‘फ़ेमिना’ पत्रिका, ‘द टाइम्स आफ़ इन्डिया’ मे भारत के सारे 9 एडिशन मे, 2000 के स्टार प्लस चैनल के ‘गुड मॉर्निन्ग इन्डिया’ शो, 2003 के ‘द टाइम्स आफ़ इंडिया’ के ‘मेन ऎन्ड विमेन’ मे।

एक साधारण भारतीय का हकलाहट के उपचार के जगत मे प्रेरणादायक असाधारण योगदान।